" So thankful to Cancer Rounds and Dr. Gaurav Dixit. Your care and support helped me heal and regain strength during my lymphoma treatment."
आज के समय में मुँह का कैंसर (Oral Cancer) तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। जो ज़्यादातर मध्यम आयु और बुज़ुर्गों में देखा जाता है। मुँह का कैंसर कई मामलों में हमारी रोज़मर्रा की आदतों से जुड़ा होता है। तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन, धूम्रपान, नियमित रूप से शराब पीना या बिना सुरक्षा धूप में अधिक समय बिताना—ये सभी ऐसे व्यवहार हैं जो इस बीमारी का जोखिम बढ़ाते हैं। भारत में तो स्थिति और भी गंभीर है—कैंसर के कुल मामलों में लगभग 30% सिर्फ मुँह के कैंसर से जुड़े होते हैं। तंबाकू सेवन, गुटखा-पान मसाला, बीड़ी-सिगरेट, शराब, खराब मौखिक स्वच्छता और HPV संक्रमण इसके प्रमुख कारण हैं।
लेकिन अच्छी बात यह है कि मुँह का कैंसर शुरूआती स्टेज में पकड़ा जाए तो इसका इलाज काफी प्रभावी और सफल होता है। इसलिए इसके शुरुआती लक्षण जानना और समय पर डॉक्टर से जांच करवाना बेहद ज़रूरी है।
Confused about treatment options?
Get a free second opinion from our oncologists
मुँह का कैंसर, जिसे ओरल कैंसर भी कहा जाता है, मुँह के किसी भी हिस्से में हो सकता है — होंठ, जीभ, गाल की अंदरूनी परत, गला (ओरोफैरिंक्स), मसूड़े जो ज़्यादातर मध्यम आयु और बुज़ुर्गों में देखा जाता है।
मुँह का कैंसर तब होता है जब मुँह के अंदर असामान्य कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। और कई बार अपने शुरुआती रूप में साधारण घाव, सफेद धब्बे या बार-बार होने वाली जलन जैसी सामान्य समस्याओं की तरह दिखाई देती है। समस्या तब बढ़ती है जब ये बदलाव लंबे समय तक बने रहते हैं और धीरे-धीरे आसपास के ऊतकों, गले और सिर-गर्दन के अन्य हिस्सों तक फैलने लगते हैं। समय पर पहचान और उपचार से न सिर्फ़ जटिलताओं को रोका जा सकता है, बल्कि जीवन की संभावना भी काफी बढ़ जाती है।
इसका संबंध अक्सर निम्न कारणों से होता है:
यह लेख विशेषज्ञों द्वारा मान्य जानकारी प्रदान करता है ताकि आप मुँह के कैंसर के जोखिम और लक्षणों को अच्छी तरह समझ सकें।
शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि जितनी जल्दी पता चलता है, उपचार का परिणाम उतना ही बेहतर होता है। यदि नीचे दिए गए किसी भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक बने रहें, तो दंत चिकित्सक या ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन को अवश्य दिखाएँ।
मुँह के अंदर कोई भी छाला, कट या घाव जो लंबे समय तक ना भरे, यह कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है—चाहे वह दर्द करे या न करे।
मुँह के अंदर दिखाई देने वाले धब्बे जो रगड़ने पर नहीं हटते:
ये जीभ, मसूड़ों या गालों में दिखाई दे सकते हैं। ये दोनों कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं और इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।
मुँह या गले में जलन, दर्द या असहजता जो किसी कारण से समझ में न आए और ठीक न हो—एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है।
मुँह या गले में जलन, दर्द या असहजता जो किसी कारण से समझ में न आए और ठीक न हो—एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है। होंठ, मुँह के अंदर या गर्दन में नई सूजन, गांठ या मोटा हिस्सा दिखे तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
जरूरी नहीं कि हमेशा दर्द हो—कई बार खाना खाते समय दर्द, निगलने में दिक्कत, बोलने में परेशानी—ये संकेत हो सकते हैं कि ट्यूमर जीभ या गले की गतिशीलता को प्रभावित कर रहा है।
जीभ या होंठ में अचानक सुन्नपन, झनझनाहट या संवेदना की कमी होना भी शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।—यह नसों पर ट्यूमर के दबाव का संकेत हो सकता है।
बिना किसी मसूड़े की बीमारी या चोट के दाँत ढीले होना—जबड़े की हड्डी प्रभावित होने का संकेत हो सकता है। अगर कोई दांत बिना मसूड़ों की बीमारी के गिर जाए, तो यह जबड़े की हड्डी में कैंसर का संकेत हो सकता है।
बिना चोट या मसूड़े की बीमारी के मुँह से खून आना भी एक संभावित चेतावनी संकेत है।
अगर एक तरफ कान में दर्द है, लेकिन कान में कोई समस्या नहीं दिखाई दे रही, तो यह गले या मुँह की कैंसरस समस्या हो सकती है।
हालाँकि, यह समझना ज़रूरी है कि ऐसे कई मरीज भी पाए जाते हैं जिनमें इनमें से कोई जोखिम कारक नहीं होता, फिर भी उन्हें मुँह का कैंसर हो जाता है। यही कारण है कि इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना और नियमित जाँच करवाना बेहद महत्वपूर्ण है।
क्लिनिकल डेटा के अनुसार, निम्न आदतें और कारण जोखिम को बढ़ाते हैं:
यदि लक्षण 2 सप्ताह से अधिक बने रहें, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलना चाहिए। डॉक्टर सामान्यतः निम्न जांच करते हैं:
मुँह के अंदर घाव, धब्बे, गांठ या असामान्य बदलावों की जांच की जाती है।
टिश्यू का छोटा नमूना लेकर माइक्रोस्कोप में जांच की जाती है।
इनसे ट्यूमर का आकार और फैलाव पता चलता है।
जरूरत पड़ने पर गले और मुँह के गहरे हिस्सों की जांच की जाती है।
1. क्या मुँह का कैंसर शुरुआती अवस्था में ठीक हो सकता है?
हाँ। यदि स्टेज 1 या 2 में पता चल जाए, तो सफलता दर 80% या उससे अधिक होती है। उपचार में आम तौर पर सर्जरी और रेडिएशन शामिल होते हैं।
2. क्या हर मुँह का छाला कैंसर होता है?
नहीं। अधिकांश छाले (कैंकर सोर्स) 7–10 दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन 2 सप्ताह से अधिक रहने वाला कोई भी छाला तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
3. मुँह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण क्या है?
तंबाकू का सेवन—चाहे चबाने वाला हो या धूम्रपान—दुनिया भर में मुँह के कैंसर का सबसे बड़ा और रोकथाम योग्य कारण है। शराब इसे और अधिक बढ़ा देती है।
Get expert guidance instantly
Tell us about your condition and we will help you find the right care.
November 5, 2025
February 22, 2022
Get expert guidance instantly
Share a few details and our medical team gets back to you within 4 hours with the next steps.
Tell us what you are facing and our medical team will guide you to the right doctors, hospitals and treatment.
Free Review, No Commitment
Free assessment with no pressure to proceed.
Trusted by 100,000+ Patients
Across 125+ countries worldwide
500+ Top Partner Hospitals
Globally accredited medical facilities
5000+ Expert Specialists
Senior doctors across major specialties.
Making quality healthcare accessible to patients worldwide
Everything you need to know about choosing the right hospital, doctor and treatment plan.